Why Agruments take place? Why you argue so much?

क्यों इतनी तर्क करे मुझसे – ‘तर्क-वितर्क’

Why Agruments take place? Why you argue so much? क्यों इतनी तर्क करे मुझसे - Agruments why?

क्यों इतनी तर्क करे मुझसे,

थोड़ा धीरज धर आ बात तो कर |

गर नहीं समझना मुझको तो,

जरा बात को तू निष्णात तो कर ||

*

मासूम उदासी छाई है,

तेरे दिल को ये अगुवाई है |

मेरे दिल की तुझे तो इज्जत हो,

सारे जग में जग- हसाई है ||

*

बात मोहब्बत की करके,

रिश्तों में होड़ लगाती हो |

गर कमियों का मूलधन हूँ मैं,

तुम सूद सहित चुकाती हो ||

*

मैं बात-बेबात बकने वाला,

तुम सब-कुछ चुप सह जाती हो |

बिन बोले तो मैं रह ना सकू,

आखिर तुम कैसे रह पाती हो?

*

मन की मैं जटिल बहुत,

तू समझने का प्रयास तो कर |

क्यों इतनी तर्क करे मुझसे,

थोड़ा धीरज धर आ बात तो कर ||

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