Don't public your private Information. Sending Nudes is dangerous. Be mature

इज्जत की पनाह – Letter To Unmarried Couples

Don't public your private Information. Sending Nudes is dangerous. Be mature

A poem considering the current scenario going worse with every new generation. It’s about the irresponsible young age people who enter a relationship for any reason whatsoever. Lot of excitement is obvious. But, thanks to the technogies we’ve got the access to. Social plateforms have shown the most horrible sketch of such immature and excited couples. Nothing else, but the harmons do the blunders. Asking for nudes on chat, making videos doing sexual activities and keeping it for future possible missuse. This is happening actually. It’s a bloody business too. Shameful but true. I hope my poem could bring some awareness.

इज्जत की पनाह में रहने वाले इश्क़ की चर्चा न कर,

खुद को गर रखना महफ़ूज़, उसको भी महफ़ूज़ तू कर |

ये दिल की जलाई जनता है जो धाक लगाये बैठी है,

कहीं नाम कमाने के रस्ते ना ले आये बदनामी को घर ||

*

सच्चा है तो पाप नहीं, कहीं दिल को लगाना श्राप नहीं,

तुम मन की माला जपते जाओ कोई उससे अच्छा जाप नहीं |

जो डूबा वही बता पाये ये कितना गहरा सागर है,

तैरने वालों को होता कभी गहराई का माप नहीं ||

*

हो सही तुम, तुम्हें लगता है, पर ख्वाब अभी भी कच्चा है,

पक्ष-विपक्ष उस निर्णय के तुम्हें जान लेना भी अच्छा है |

और प्यार किया है दिल से तो उसे बेशर्मी की राह न दे,

नग्न शरीर की आग है झूठी, रूह का प्यार ही सच्चा है ||

*

बुरे नहीं अन्जान अगर तुम कीमत इसकी समझे तो,

कर्ज अदायी में बिक जाओगे आग में इसकी उलझे तो |

ये घर-परिवार और मान-सम्मान एक सूखे पेड़ की पत्तियाँ हैं,

क्षण भर का एक खेल होगा हुये निलाम गर पर्चे जो ||

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